विदेशी निवेशकों की नए साल की शुरुआत में सतर्कता: पहले दो सत्रों में भारतीय बाजार से 7,608 करोड़ रुपये की निकासी
अमर उजाला की बिजनेस अपडेट के मुताबिक 2026 के शुरुआती दो कारोबारी सत्रों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 7,608 करोड़ रुपये निकाले। रिपोर्ट में मुद्रा अस्थिरता, वैश्विक व्यापार तनाव और संभावित टैरिफ चिंताओं को कारण बताया गया।
2026 की शुरुआत में एफपीआई का रुख: निकासी बनाम जोखिम
अमर उजाला की 5 जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने नए साल के शुरुआती दो कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार से 7,608 करोड़ रुपये निकाले। यह संकेत देता है कि वैश्विक निवेशक वर्ष की शुरुआत में जोखिम का आकलन ज्यादा सावधानी से कर रहे हैं।

रिपोर्ट में यह संदर्भ भी आया कि 2025 में कुल निकासी काफी बड़ी रही थी, जिसके बाद 2026 की शुरुआत में भी सतर्कता दिखी। बाजार में निकासी का मतलब हमेशा लंबी अवधि की नकारात्मकता नहीं होता, लेकिन यह जरूर बताता है कि निवेशक अल्पकाल में अनिश्चितताओं को भारी मान रहे हैं।
किन वजहों का जिक्र किया गया
- मुद्रा (करेंसी) में अस्थिरता और वैश्विक जोखिम
- वैश्विक व्यापार तनाव और अमेरिका की संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर चिंता
- महंगे वैल्यूएशन के चलते मुनाफावसूली का दबाव
इन कारणों के चलते निवेशक कभी-कभी इक्विटी एक्सपोजर घटाकर सुरक्षित परिसंपत्तियों (जैसे डॉलर-डिनॉमिनेटेड इंस्ट्रूमेंट्स या बॉन्ड) की ओर झुकते हैं। साथ ही, उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह अक्सर अमेरिकी दरों, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक जोखिम धारणा से तेज़ी से प्रभावित होता है।
आगे का संकेत: घरेलू निवेश और सेक्टर-रोटेशन
एफपीआई के उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू संस्थागत निवेश (DII) और खुदरा निवेशक बाजार को स्थिरता दे सकते हैं। हालांकि, निकासी के दौर में सेक्टर-रोटेशन बढ़ने की संभावना रहती है—जहां निवेशक अपेक्षाकृत ‘डिफेंसिव’ सेक्टर या कैश-फ्लो मजबूत कंपनियों को प्राथमिकता देते हैं।
एफपीआई फ्लो बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख संकेतकों में है—लेकिन इसे वैश्विक दरों, मुद्रा चाल और घरेलू आय-आकड़ों के साथ मिलाकर देखना जरूरी है।