बजट 2026-27 में AI और डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम पर खास फोकस जरूरी: PHDCCI
PHDCCI का कहना है कि 2026-27 के बजट में AI और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए लक्षित नीतिगत समर्थन और पूंजीगत खर्च बढ़ाने की जरूरत है, ताकि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को तेजी मिले और नवाचार-आधारित नौकरियां बनें.
उद्योग जगत के संगठन PHD चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने बजट 2026-27 को लेकर सरकार से मांग की है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को नीति, निवेश और इन्फ्रास्ट्रक्चर—तीनों स्तरों पर विशेष प्राथमिकता दी जाए। संगठन का तर्क है कि अगले विकास चरण में डेटा, कंप्यूटिंग, उन्नत विनिर्माण और रिसर्च-टू-मार्केट पाइपलाइन भारत की प्रतिस्पर्धा तय करेगी, इसलिए बजट में ऐसे क्षेत्रों के लिए स्पष्ट रोडमैप, फंडिंग और इंसेंटिव जरूरी हैं.

PHDCCI के अनुसार ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) बढ़ाने की जरूरत बनी हुई है। संगठन का मानना है कि सड़क, रेल, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश से उद्योगों की लागत घटेगी, प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी और निजी क्षेत्र के निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा. साथ ही, यदि डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को AI-रेडी बनाया जाए तो स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सरकारी सेवाओं में बड़े पैमाने पर दक्षता हासिल की जा सकती है.
AI/Deep Tech स्टार्टअप्स को क्या चाहिए?
PHDCCI की मांगों का केंद्र यह है कि डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए केवल सामान्य स्टार्टअप-फ्रेंडली घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। इन कंपनियों को लंबा अनुसंधान चक्र, उच्च लागत वाला हार्डवेयर/कंप्यूट, टेस्टिंग सुविधाएं, रेगुलेटरी सैंडबॉक्स, और शुरुआती ग्राहकों तक पहुंच जैसी जरूरतें होती हैं। संगठन के मुताबिक बजट में ऐसे प्रावधान होने चाहिए जो रिसर्च, प्रोटोटाइपिंग, IP निर्माण, और स्केलिंग के बीच मौजूद ‘वैली ऑफ डेथ’ को कम कर सकें.
स्टार्टअप इकोसिस्टम के संदर्भ में PHDCCI का जोर यह भी है कि सरकारी खरीद, पब्लिक सेक्टर पायलट प्रोजेक्ट्स और डोमेस्टिक वैल्यू-एडेड टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने से भारतीय AI समाधान देश की जरूरतों के अनुरूप तेज़ी से विकसित हो सकते हैं। इससे न सिर्फ रोजगार पैदा होंगे, बल्कि भारत की टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी.
बजट से अपेक्षाएं: इनोवेशन + इन्फ्रास्ट्रक्चर का कॉम्बो
संगठन की बात का सार यह है कि AI और डीप-टेक को ‘भविष्य का सेक्टर’ मानकर अलग-थलग न देखा जाए, बल्कि इसे इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्किलिंग, मैन्युफैक्चरिंग और सरकारी सेवा-डिलीवरी के साथ जोड़कर देखा जाए। PHDCCI का दावा है कि यदि बजट में पूंजीगत खर्च के साथ-साथ नई तकनीकों के लिए लक्षित सहायता बढ़ाई जाती है, तो 2026-27 के दौरान भारत इनोवेशन-ड्रिवन ग्रोथ की दिशा में तेजी से बढ़ सकता है.
आने वाले हफ्तों में बजट चर्चाओं का फोकस इस बात पर भी रहेगा कि सरकार किस हद तक AI को प्राथमिक सेक्टर मानकर अलग वित्तीय प्रावधान करती है, और किन क्षेत्रों—जैसे हेल्थटेक, एग्रीटेक, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और साइबर सुरक्षा—में डीप-टेक स्टार्टअप्स को रणनीतिक समर्थन मिलता है. उद्योग जगत की नजर इस पर है कि नीतिगत संकेत कितने स्पष्ट और क्रियान्वयन योग्य होंगे, ताकि घोषणाएं सिर्फ इरादों तक सीमित न रह जाएं.