कश्मीर में ताज़ा बर्फबारी के बीच श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग तीसरे दिन भी बंद, सैकड़ों वाहन फंसे
कश्मीर के कई हिस्सों में ताज़ा बर्फबारी के बाद श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) 25 जनवरी 2026 को लगातार तीसरे दिन बंद रहा। 270 किमी लंबी सड़क पर शुक्रवार से सैकड़ों वाहन फंसे हैं और बर्फ हटाने का काम जारी है, जबकि कुलगाम समेत कुछ इलाकों में फिर से बर्फबारी होने से बहाली में देरी हो रही है।
कश्मीर में मौसम ने एक बार फिर आवाजाही की रफ्तार रोक दी है। 25 जनवरी 2026 (रविवार) को श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) लगातार तीसरे दिन बंद रहा। अधिकारियों के मुताबिक, श्रीनगर सहित घाटी के कुछ हिस्सों में ताज़ा बर्फबारी हुई, जिससे पहले से चल रहे स्नो-क्लियरेंस ऑपरेशन और चुनौतीपूर्ण हो गए। इस 270 किलोमीटर लंबे राजमार्ग पर शुक्रवार को भारी बर्फबारी के बाद यातायात रोक दिया गया था और तब से कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें बनी हुई हैं।

यातायात पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सड़क से बर्फ हटाने का काम जारी है, लेकिन कुलगाम जिले के आसपास राजमार्ग के करीब फिर से बर्फबारी हो रही है। ऐसे में सड़क बहाली में और समय लग सकता है। बंद राजमार्ग का असर सिर्फ निजी कारों या पर्यटक वाहनों तक सीमित नहीं रहा—बसें, ट्रक और आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई करने वाले वाहन भी रास्ते में अटक गए हैं।
राजमार्ग के बंद रहने से घाटी और जम्मू क्षेत्र के बीच आवागमन बाधित होता है, क्योंकि यह कश्मीर का प्रमुख ‘ऑल वेदर’ संपर्क मार्ग माना जाता है। जब यह लिंक टूटता है, तो लोगों की यात्रा योजनाएं, माल ढुलाई और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ता है। कई यात्रियों को ठंड में लंबे समय तक इंतज़ार करना पड़ रहा है, जबकि प्रशासन प्राथमिकता के आधार पर मार्ग को सुरक्षित बनाने और फंसे हुए वाहनों को निकालने की कोशिश कर रहा है।
इस बीच श्रीनगर शहर में भी रविवार तड़के हल्की बर्फबारी दर्ज की गई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ान परिचालन प्रभावित नहीं हुआ और कुछ उड़ानें मौसम के बावजूद सफलतापूर्वक पहुंचीं। अधिकारी यात्रियों को सलाह दे रहे हैं कि वे सड़क यात्रा पर निकलने से पहले आधिकारिक ट्रैफिक अपडेट जरूर देखें और अनावश्यक यात्रा से बचें, क्योंकि ताज़ा बर्फबारी के साथ फिसलन और भूस्खलन-प्रवण इलाकों में जोखिम बढ़ जाता है।
मौसम में बदलाव के साथ ही आने वाले घंटों में बहाली का काम तेज करने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन अंतिम निर्णय सड़क की स्थिति, दृश्यता और नए हिमपात की तीव्रता पर निर्भर करेगा।