गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: लोकतंत्र, वोटर भागीदारी और देश की दिशा पर जोर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 जनवरी 2026 (राष्ट्रीय मतदाता दिवस) और 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए लोकतांत्रिक परंपराओं, नागरिक कर्तव्यों और महिलाओं की बढ़ती मतदान भागीदारी को भारत के गणतंत्र की ताकत बताया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि गणतंत्र दिवस हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य में देश की दिशा का अवलोकन करने का अवसर देता है। उन्होंने याद दिलाया कि 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस भी मनाया जाता है, जब देश की चुनावी यात्रा और नागरिकों के मताधिकार के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

राष्ट्रपति ने लोकतंत्र के मजबूत होने को मतदान की व्यापक भागीदारी से जोड़ा और कहा कि वयस्क नागरिक उत्साहपूर्वक वोट देकर जनप्रतिनिधियों के चयन में अपनी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी भारत के गणतंत्र का एक ‘शक्तिशाली आयाम’ बताया, जो समाज में बदलते दृष्टिकोण और नागरिक चेतना के विस्तार का संकेत देता है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि गणतंत्र और संविधान केवल संस्थागत ढांचा नहीं हैं, बल्कि नागरिकों के व्यवहार और जिम्मेदारियों से जीवंत होते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने मतदाता जागरूकता, लोक-भागीदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता की तरह देखने की बात कही।
संदेश के व्यापक स्वर में राष्ट्र की विविधता और एकता, सार्वजनिक जीवन में अनुशासन तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति भरोसे की जरूरत को सामने रखा गया। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय पर्वों की भावना सिर्फ समारोहों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वह नागरिक आचरण, कर्तव्य और सामाजिक एकजुटता में भी दिखाई दे।
राष्ट्रपति के संबोधन को 26 जनवरी 2026 को देश भर में होने वाले गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों की पृष्ठभूमि में अहम माना जा रहा है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस का उल्लेख यह संकेत देता है कि लोकतंत्र की जड़ें केवल चुनावी प्रक्रिया में नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों की सतत भागीदारी में हैं। आने वाले दिनों में भी चुनावी सुधार, मतदाता सुविधाएं और भागीदारी बढ़ाने जैसे विषय सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बने रहने की संभावना है।