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‘सफल भारत दुनिया को स्थिर बनाता है’: गणतंत्र दिवस पर ईयू नेतृत्व का संदेश

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी ने नई दिल्ली और ब्रसेल्स के रिश्तों को नई राजनीतिक-आर्थिक दिशा देने का संकेत दिया। कार्यक्रम के साथ-साथ साझेदारी, निवेश और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था पर भी जोर दिखा।

26 जनवरी 2026 को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की भागीदारी सुर्खियों में रही। रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष की मौजूदगी को भारत-ईयू संबंधों में एक मजबूत राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

‘सफल भारत दुनिया को स्थिर बनाता है’: गणतंत्र दिवस पर ईयू नेतृत्व का संदेश
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डीडब्ल्यू की रिपोर्ट में उर्सुला फॉन डेय लाएन के हवाले से कहा गया कि “सफल भारत दुनिया को स्थिर बनाता है।” यह बयान ऐसे समय आया है जब भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति शृंखलाओं के पुनर्संयोजन और तकनीक-व्यापार नियमों को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज है।

क्यों अहम है ईयू की औपचारिक भागीदारी

गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि आम तौर पर उस साझेदारी की प्राथमिकता दर्शाता है, जिसे भारत रणनीतिक महत्व देता है। ईयू का एक 27-देशों वाला संघ होने के बावजूद उच्चतम स्तर पर प्रतिनिधित्व दिखाता है कि दोनों पक्ष रिश्तों को सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि व्यापक संस्थागत ढांचे में आगे बढ़ाना चाहते हैं।

समारोह की राजनीतिक प्रतीकात्मकता से अलग, बातचीत का एक बड़ा हिस्सा व्यापार, निवेश, मानकों (स्टैंडर्ड्स), और भविष्य की टेक्नोलॉजी साझेदारी से भी जुड़ता है। भारत लंबे समय से यूरोप के साथ उद्योग, हरित ऊर्जा और सप्लाई-चेन साझेदारी को बढ़ाने की बात करता रहा है।

व्यापार और ‘स्थिरता’ का संदेश

‘स्थिरता’ का संदेश केवल कूटनीतिक भाषा नहीं है। इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में भरोसे, नियमों के अनुपालन और साझेदारियों की निरंतरता के संदर्भ में भी समझा जा रहा है। यूरोप के लिए भारत एक बड़ा बाजार है, और भारत के लिए यूरोप तकनीक, पूंजी और उच्च-मानक औद्योगिक नेटवर्क का बड़ा स्रोत।

इन व्यापक संदर्भों में, 26 जनवरी का मंच केवल परेड तक सीमित नहीं रहा। यह दोनों पक्षों के लिए अपने-अपने घरेलू दर्शकों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संकेत देने का अवसर भी था कि भारत-ईयू संबंध आने वाले वर्षों में अधिक ठोस एजेंडे की ओर बढ़ रहे हैं।

समारोह के साथ जुड़ा संदेश यह भी है कि भारत-यूरोप संबंध केवल ‘कूटनीति’ नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, तकनीक और सुरक्षा के साझा हितों पर टिके हैं।

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