भारत-ईयू ने ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पूरा किया, ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा गया
भारत और यूरोपीय यूनियन ने करीब दो दशक की बातचीत के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सहमति बनाई है। समझौते के तहत दोनों पक्ष अधिकांश वस्तुओं पर टैरिफ घटाने/खत्म करने की दिशा में बढ़ेंगे और इसे रणनीतिक साझेदारी के बड़े कदम के तौर पर पेश किया गया है।
भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) ने 27 जनवरी 2026 को एक बड़े फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बनाई। यह समझौता लगभग 20 वर्षों से चल रही, रुक-रुक कर हुई वार्ताओं के बाद संभव हुआ। EU प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा, जबकि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे दोनों पक्षों के लोगों के लिए बड़े अवसर खोलने वाला करार दिया।

इस करार का दायरा काफी व्यापक बताया गया है: टेक्सटाइल, दवाइयों, इंजीनियरिंग गुड्स और कई औद्योगिक उत्पादों से लेकर यूरोपीय कारों और वाइन तक, लगभग सभी वस्तुओं के व्यापार पर टैरिफ घटाने की रूपरेखा इसमें शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत EU के 96.6% निर्यात पर टैरिफ कम/खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाएगा, जबकि EU भारत के लगभग 99% निर्यात (मूल्य के हिसाब से) को चरणबद्ध तरीके से बेहतर पहुंच देगा।
समझौते का मकसद सिर्फ टैरिफ कटौती नहीं है, बल्कि आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक एकीकृत करना, संयुक्त विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना और सीमा शुल्क/प्रक्रियाओं को सरल बनाना भी है। खबरों में कहा गया है कि यह करार यूरोपीय निर्यातकों के लिए सालाना अरबों यूरो के शुल्क बचत और रोजगार सृजन से भी जुड़ सकता है।
हालांकि, इस डील को लागू होने से पहले अंतिम कानूनी मसौदे, EU की ओर से यूरोपीय संसद और सदस्य देशों की मंजूरी, और भारत की ओर से औपचारिक स्वीकृतियों जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। इसलिए, सहमति बनने के बावजूद जमीनी क्रियान्वयन में कुछ महीनों का समय लग सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह समझौता ऐसे समय पर सामने आया है जब वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ी है और कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपने-अपने साझेदारों का दायरा विस्तृत कर रही हैं। भारत और EU दोनों ने इसे आर्थिक के साथ-साथ रणनीतिक संबंधों को नया आकार देने वाला कदम भी बताया है।