बजट सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक: सरकार ने मांगा सहयोग, विपक्ष ने उठाए प्रमुख मुद्दे
बजट सत्र की शुरुआत से पहले केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें 26 से अधिक नेताओं ने भाग लिया। बैठक में सरकार ने सत्र के सुचारू संचालन के लिए सहयोग मांगा, जबकि विपक्ष ने अपने मुद्दों को सामने रखने के संकेत दिए।
बजट सत्र 2026 की शुरुआत से ठीक पहले केंद्र सरकार ने संसद के कामकाज को लेकर सर्वदलीय बैठक आयोजित की। बैठक का उद्देश्य यही बताया गया कि सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही बाधित न हो और प्रमुख विधायी तथा आर्थिक एजेंडे पर चर्चा व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़े। इस बैठक में कई दलों के फ्लोर लीडर्स और प्रतिनिधि शामिल हुए और सरकार ने सभी से सहयोग की अपील की।

बैठक में कांग्रेस की ओर से जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी, मणिक्कम टैगोर, के. सुरेश जैसे नेताओं की मौजूदगी का उल्लेख किया गया। अन्य दलों से भी वरिष्ठ प्रतिनिधि पहुंचे। इन बैठकों की भूमिका सामान्यतः “टकराव कम करने” की होती है, लेकिन यह भी सच है कि बजट सत्र में बहस के विषय केवल वित्तीय घोषणाओं तक सीमित नहीं रहते—राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दे भी अक्सर केंद्र में आ जाते हैं।
सरकार की ओर से यह संदेश दिया गया कि बजट सत्र, खासकर राष्ट्रपति के अभिभाषण, आर्थिक सर्वेक्षण और बजट प्रस्तुति जैसे अहम पड़ावों के दौरान, सदन में सुचारू कार्यवाही आवश्यक है। ऐसे समय में सरकार नीतिगत एजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश करती है, जबकि विपक्ष कई मुद्दों पर जवाबदेही और चर्चा की मांग करता है।
बजट सत्र 28 जनवरी 2026 से शुरू हो रहा है और इसके दौरान राष्ट्रपति का संयुक्त संबोधन, 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश होने जैसी घटनाएं एजेंडे का हिस्सा हैं। इसी वजह से सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक का महत्व बढ़ जाता है। यह राजनीतिक समन्वय का वह मंच होता है जहां सरकार अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करती है और विपक्ष अपने मुद्दों का संकेत देता है।
बैठक के संदर्भ में यह भी बताया गया कि विभिन्न दलों के 26 से अधिक नेता इसमें शामिल हुए। ऐसी बैठकों में आमतौर पर विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, संघीय मुद्दे, एजेंसियों के दुरुपयोग जैसे आरोप, या किसी राज्य से जुड़े विवादों को बहस में लाने का संकेत देता है। वहीं सरकार बजट, विधायी सुधारों और नीतिगत निरंतरता के लिए समर्थन और समय चाहती है।
बजट सत्र की प्रकृति देखते हुए आने वाले दिनों में सदन के भीतर टकराव और सहमति—दोनों की संभावनाएं रहती हैं। सर्वदलीय बैठक का मकसद यही है कि न्यूनतम सहमति के आधार पर कार्यवाही आगे बढ़े, ताकि विधायी कामकाज और बजटीय प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।