UIDAI ने लॉन्च किया New Aadhaar App: डिटेल्स हाइड कर शेयरिंग, ऑफलाइन वेरिफिकेशन और अपडेट फीचर
UIDAI ने भारत में New Aadhaar App का फुल वर्जन लॉन्च किया है। ऐप में फोटो, नाम, जन्मतिथि, जेंडर, मोबाइल नंबर जैसी डिटेल्स को हाइड/अनहाइड करने का विकल्प है और पहचान सत्यापन को अधिक प्राइवेसी-फ्रेंडली बनाने पर जोर दिया गया है।
आधार उपयोगकर्ताओं के लिए UIDAI ने New Aadhaar App का फुल वर्जन लॉन्च कर दिया है। लॉन्चिंग के लिए एक इवेंट का आयोजन होने और वहां UIDAI अधिकारियों द्वारा ऐप के फीचर्स बताए जाने की जानकारी दी गई। इस ऐप का उद्देश्य पहचान सत्यापन को सरल बनाना, और साथ ही यूजर्स को यह नियंत्रण देना है कि वे अपनी कौन-कौन सी जानकारी दिखाना चाहते हैं और कौन सी छिपाना चाहते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, New Aadhaar App में यूजर्स फोटो, नाम, डेट ऑफ बर्थ, जेंडर, मोबाइल नंबर और अन्य विवरणों को हाइड कर सकते हैं। यानी किसी जगह पहचान दिखानी हो तो पूरा डेटा साझा करने की जरूरत नहीं पड़े—केवल जरूरत भर की जानकारी दिखाने का विकल्प मिलेगा। यह डिजाइन “प्राइवेसी फर्स्ट” अप्रोच की दिशा में एक कदम के तौर पर प्रस्तुत किया गया है।
ऐप का इंटरफेस इस तरह तैयार किया गया है कि यूजर्स चेक/अनचेक बॉक्स के माध्यम से तय कर सकें कि कौन-सी डिटेल्स दिखाई जाएं। ऐप ओपन करने पर एक QR कोड दिखने और आधार नंबर को हाइड रखने जैसी व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया। इससे अलग-अलग जगहों पर पहचान सत्यापन के दौरान अनावश्यक डेटा शेयरिंग को कम करने की बात कही गई है।
New Aadhaar App में ऑफलाइन वेरिफिकेशन को भी शामिल किए जाने की जानकारी दी गई। इसका अर्थ यह है कि विजिटर्स की ऑथेंटिसिटी जांच, सिक्योरिटी चेक जैसे उपयोग मामलों में ऐप का इस्तेमाल बढ़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भविष्य में सुरक्षा गार्ड से लेकर ऑफिस एंट्री तक, पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में ऐप की उपयोगिता बढ़ाई जा सकती है।
ऐप एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म के लिए उपलब्ध बताया गया है। जिन यूजर्स के फोन में पहले से यह ऐप मौजूद है, उन्हें नए फीचर्स के लिए ऐप अपडेट करने की जरूरत पड़ सकती है। डिजिटल पहचान के उपयोग बढ़ने के साथ ऐप-आधारित सत्यापन को सुविधाजनक माना जा रहा है, लेकिन साथ ही डेटा सुरक्षा और विश्वसनीय उपयोग के मानक भी उतने ही महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
कुल मिलाकर, New Aadhaar App को पहचान सत्यापन में सुविधा और प्राइवेसी नियंत्रण के संयोजन के तौर पर पेश किया गया है। अब यह देखना अहम होगा कि विभिन्न संस्थान और सेवाएं इस ऐप-आधारित वेरिफिकेशन को किस गति से अपनाती हैं, और वास्तविक उपयोग में यह अनुभव कितना सहज और भरोसेमंद साबित होता है।