बजट 2026-27 से पहले नई स्टडी का सुझाव: सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च बढ़े; बढ़ती लागत और असमान पहुंच पर चिंता
Union Budget 2026-27 से पहले जारी एक अकादमिक अध्ययन में भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय बढ़ाने की सिफारिश की गई है। स्टडी के मुताबिक आर्थिक-सामाजिक बदलावों के साथ इलाज की लागत बढ़ रही है और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में असमानताएं भी गहरी हो रही हैं, इसलिए सार्वजनिक निवेश बढ़ाकर इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वभौमिक पहुंच को मजबूत करना जरूरी है।
क्या कहती है स्टडी: ‘पब्लिक हेल्थ स्पेंड’ बढ़ाने की जरूरत
केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले जारी एक अकादमिक अध्ययन ने भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय (public healthcare expenditure) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की वकालत की है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में आर्थिक और सामाजिक बदलावों के बीच इलाज की लागत बढ़ रही है और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में असमानता भी बढ़ती दिख रही है। ऐसे में स्टडी का तर्क है कि स्वास्थ्य पर सार्वजनिक निवेश बढ़ाकर ‘इक्विटेबल’ और ‘अफोर्डेबल’ पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च का बढ़ना केवल अस्पतालों की इमारतें बनाने तक सीमित नहीं होता। इसमें डॉक्टर-नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता, जरूरी दवाओं की सप्लाई, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का नेटवर्क, रोग-निगरानी (disease surveillance), टीकाकरण, लैब कैपेसिटी, और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था जैसे घटक भी आते हैं। जब ये घटक कमजोर होते हैं, तो परिवारों पर आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च बढ़ता है और गरीबी का जोखिम बढ़ता है।
लागत और असमानता: नीति-निर्माताओं के सामने मुख्य चुनौती
स्टडी के हवाले से रिपोर्ट बताती है कि बदलती जीवनशैली, गैर-संचारी रोगों (जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन), बुजुर्ग आबादी के बढ़ने और उपचार तकनीक के महंगे होने जैसे कारकों के चलते मेडिकल खर्च बढ़ना एक दीर्घकालिक ट्रेंड बन रहा है। इसके साथ-साथ यदि सार्वजनिक व्यवस्था पर्याप्त न हो, तो निजी इलाज पर निर्भरता बढ़ती है और ग्रामीण/कम आय वाले परिवार ज्यादा दबाव में आते हैं।
नीति-स्तर पर सवाल यह है कि सीमित संसाधनों के बीच किस तरह ‘बेसिक हेल्थकेयर’ को सार्वभौमिक बनाया जाए। विशेषज्ञ अक्सर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं (primary care) पर निवेश बढ़ाने को सबसे किफायती कदम मानते हैं, क्योंकि यह बीमारी की शुरुआती पहचान, समय पर उपचार, और अस्पतालों पर बोझ घटाने में मदद करता है।
बजट 2026-27 में क्या उम्मीदें बनती हैं
बजट के समय स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी अपेक्षाएं आम तौर पर तीन स्तरों पर होती हैं: (1) सार्वजनिक अस्पतालों और PHC/CHC की क्षमता बढ़ाना, (2) मानव संसाधन—डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिक्स—की भर्ती और प्रशिक्षण, और (3) दवाओं/डायग्नोस्टिक्स की उपलब्धता। स्टडी का संदेश यही है कि यदि सार्वजनिक निवेश पर्याप्त नहीं बढ़ता, तो बढ़ती लागत और असमानता का दबाव आगे और तेज हो सकता है।
- संदर्भ: बजट 2026-27 से पहले नई अकादमिक स्टडी
- मुख्य मांग: सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि
- कारण: बढ़ती मेडिकल लागत और पहुंच में असमानता
- लक्ष्य: मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वभौमिक, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं