बच्चों के टीकाकरण पर बड़ा बदलाव: जन्म के 24 घंटे में Hepatitis B डोज को लेकर CDC की सलाह में बदलाव की रिपोर्ट
NDTV लाइफस्टाइल की रिपोर्ट के अनुसार, CDC की नीति को दिशा देने वाली सलाहकार समिति (ACIP) ने दिसंबर 2025 में उन शिशुओं के लिए Hepatitis B की नियमित जन्म-खुराक की सिफारिश बंद करने का निर्णय लिया, जिनकी माताएं Hepatitis B के लिए नेगेटिव हैं।
बच्चों के नियमित टीकाकरण से जुड़ी एक अहम खबर में Hepatitis B वैक्सीन की जन्म-खुराक (birth dose) पर चर्चा हुई है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, दशकों तक अमेरिकी नीति में यह सिफारिश रही कि हर शिशु को जन्म के 24 घंटों के भीतर Hepatitis B का टीका दिया जाए—भले ही मां को संक्रमण हो या नहीं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि लंबे समय तक इस रणनीति के चलते बच्चों और किशोरों में Hepatitis B संक्रमण में बड़ी गिरावट दर्ज हुई। हालांकि, खबर के अनुसार दिसंबर 2025 में टीकाकरण संबंधी सलाहकार समिति (ACIP), जो CDC की नीति को गाइड करती है, ने एक महत्वपूर्ण बदलाव का निर्णय लिया।
NDTV के अनुसार, ACIP ने उन शिशुओं के लिए Hepatitis B की नियमित जन्म-खुराक की सिफारिश बंद करने का फैसला किया जो Hepatitis B-नेगेटिव माताओं से पैदा हुए हैं। यह बदलाव नीति स्तर पर बड़ा माना जा रहा है, क्योंकि birth dose की सार्वभौमिक (universal) रणनीति कई वर्षों से सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों का मुख्य हिस्सा रही है।
ऐसे बदलावों का व्यावहारिक असर यह हो सकता है कि अस्पतालों और पेरेंटिंग गाइडलाइंस में टीकाकरण शेड्यूल की भाषा, जोखिम-आधारित (risk-based) निर्णय और मां की स्क्रीनिंग/टेस्टिंग की भूमिका पर ज्यादा जोर आए। रिपोर्ट की भाषा के आधार पर यह मामला खासतौर पर उन स्थितियों से जुड़ा है जहां मां की Hepatitis B स्थिति स्पष्ट रूप से नेगेटिव हो।
ध्यान देने वाली बात यह है कि टीकाकरण की नीतियां देश-दर-देश अलग होती हैं और भारत में लागू दिशानिर्देश अलग संस्थाओं व कार्यक्रमों के तहत तय होते हैं। फिर भी, वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में होने वाले बदलावों पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि इससे भविष्य में रिसर्च, बहस और गाइडलाइंस अपडेट की दिशा तय हो सकती है।
यदि कोई अभिभावक इस खबर को पढ़कर अपने बच्चे के टीकाकरण को लेकर भ्रमित हो, तो सबसे सुरक्षित कदम यही है कि वह अपने देश/राज्य के आधिकारिक टीकाकरण कार्यक्रम और बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर निर्णय ले—खासकर Hepatitis B जैसे संक्रमणों में, जहां मातृ-स्थिति और समय पर डोज का क्लिनिकल महत्व बड़ा माना जाता है।