WHO ने कुष्ठ (लेप्रोसी) मुक्त दुनिया के लिए प्रतिबद्धता दोहराई, नोवार्टिस के साथ साझेदारी 2026-2030 तक बढ़ी
WHO ने वर्ल्ड लेप्रोसी डे से पहले जारी अपडेट में कहा कि लेप्रोसी का इलाज बहु-दवा थेरेपी (MDT) से संभव है, लेकिन कलंक बड़ी चुनौती बना है। WHO और Novartis ने MDT की मुफ्त आपूर्ति सहित सहयोग को 2026-2030 के लिए बढ़ाया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 21 जनवरी 2026 को वर्ल्ड लेप्रोसी डे (25 जनवरी) से पहले जारी एक अपडेट में कुष्ठ (लेप्रोसी) उन्मूलन के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। WHO ने रेखांकित किया कि लेप्रोसी एक संक्रामक बीमारी है, जो त्वचा और परिधीय नसों को प्रभावित कर सकती है, और समय पर इलाज न मिलने पर विकलांगता व सामाजिक बहिष्कार तक की स्थिति पैदा हो सकती है।

WHO के अनुसार, लेप्रोसी का इलाज बहु-दवा थेरेपी (Multidrug Therapy/MDT) से संभव है और इलाज तक पहुंच ही उन्मूलन प्रयासों का आधार है। हालांकि, संस्था ने यह भी कहा कि बीमारी का कलंक (stigma) अब भी सबसे बड़ी चुनौतियों में बना हुआ है, जो इलाज के बाद भी प्रभावित लोगों के जीवन को कठिन बना सकता है।
अपडेट में बताया गया कि 2024 के लिए WHO को रिपोर्ट करने वाले 188 देशों/क्षेत्रों में से 55 ने शून्य मामलों की रिपोर्ट दी, फिर भी उसी वर्ष वैश्विक स्तर पर 172,717 नए मामले सामने आए। WHO ने इसे प्रगति और शेष चुनौती—दोनों के संकेत के रूप में प्रस्तुत किया।
इसी संदर्भ में WHO और दवा कंपनी Novartis ने अपने सहयोग को आगे बढ़ाने की घोषणा की। WHO ने कहा कि 2000 से चल रही साझेदारी के तहत MDT और कुछ जरूरी दवाएं दुनिया भर के मरीजों को मुफ्त उपलब्ध कराई जाती रही हैं। अब समझौता (MoU) 2026 से 2030 तक के लिए बढ़ाया गया है, जिसमें दवाओं की आपूर्ति के साथ-साथ खरीद/वितरण और कुछ निवारक हस्तक्षेपों के लिए समर्थन का भी उल्लेख है।
WHO ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य सिर्फ ‘पब्लिक हेल्थ समस्या के रूप में उन्मूलन’ तक सीमित नहीं, बल्कि संक्रमण प्रसारण को रोकने और सामाजिक भेदभाव/कलंक को घटाने पर भी है। संस्था ने राजनीतिक प्रतिबद्धता, समुदाय की भागीदारी और दीर्घकालिक साझेदारी को आगे की सफलता के लिए निर्णायक बताया।