YouTube पर हेल्थ सर्च और AI ओवरव्यू का बढ़ता असर: गलत जानकारी के जोखिम पर सवाल
एक रिपोर्ट में बताया गया कि हेल्थ से जुड़े सवालों में YouTube वीडियो और AI-ओवरव्यू रिजल्ट्स तेजी से ऊपर दिखते हैं। इससे लोगों के डॉक्टर से पहले इंटरनेट पर भरोसा करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, लेकिन गलत जानकारी का जोखिम भी बना रहता है।
हेल्थ से जुड़ी जानकारी पाने का तरीका तेजी से बदल रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सिरदर्द, लिवर रिपोर्ट, डिप्रेशन या इलाज जैसे सवालों के जवाब अब लोग पहले डॉक्टर से नहीं, बल्कि गूगल/इंटरनेट से खोजते हैं—और सर्च रिजल्ट में AI ओवरव्यू और YouTube वीडियो अक्सर सबसे ऊपर दिखने लगे हैं। यह ट्रेंड सुविधा देता है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा खतरा भी जुड़ा है: गलत या अधूरी जानकारी का तेजी से फैलना और उसका ‘इलाज’ की तरह इस्तेमाल हो जाना।

रिपोर्ट में यह बात भी रेखांकित की गई कि YouTube पर अच्छे डॉक्टर और अस्पतालों के चैनल जरूर मौजूद हैं, लेकिन वहां वेलनेस इन्फ्लुएंसर और वायरल ट्रेंड्स भी उतनी ही तेजी से उभरते हैं। कई बार ‘घरेलू नुस्खे’ या ‘त्वरित इलाज’ जैसी सामग्री वैज्ञानिक प्रमाण के बिना लोकप्रिय हो जाती है और लोग उसे अपनी स्थिति पर लागू कर लेते हैं। इससे गलत सेल्फ-डायग्नोसिस, दवाओं का गलत उपयोग या जरूरी इलाज में देरी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
AI ओवरव्यू जैसे फीचर कई स्रोतों से सार निकालकर तुरंत उत्तर दिखाते हैं, लेकिन सामान्य यूजर अक्सर यह नहीं देख पाता कि सूचना का स्रोत कितना विश्वसनीय है, संदर्भ क्या है और क्या यह जवाब उसकी उम्र/लक्षण/मेडिकल हिस्ट्री पर लागू भी होता है या नहीं। स्वास्थ्य के मामलों में ‘वन-साइज-फिट्स-ऑल’ जवाब खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि एक ही लक्षण अलग-अलग कारणों से पैदा हो सकता है और उसके लिए जांच जरूरी हो सकती है।
रिपोर्ट के संकेतों से यह निष्कर्ष निकलता है कि इंटरनेट से जानकारी लेना उपयोगी है, लेकिन उसे अंतिम निर्णय का आधार नहीं बनाना चाहिए। बेहतर तरीका यह है कि लोग लक्षणों को समझने, सवाल तैयार करने और विश्वसनीय स्रोत पहचानने के लिए ऑनलाइन मदद लें—और जब लक्षण गंभीर हों, लंबे समय तक रहें या बिगड़ें तो डॉक्टर से परामर्श लें। कुल मिलाकर, 2026 में हेल्थ इन्फॉर्मेशन का ‘डिजिटल शिफ्ट’ जितना तेज है, उतनी ही जरूरत ‘डिजिटल हेल्थ लिटरेसी’ की भी बढ़ रही है।