पंजाब में चुनाव से पहले कांग्रेस में CM चेहरे को लेकर घमासान, राजा वड़िंग और चरणजीत चन्नी प्रमुख दावेदार
पंजाब में आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर खींचतान तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को मजबूत दावेदार माना जा रहा है, जबकि नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा भी समीकरण में एक अहम ध्रुव के तौर पर उभर रहे हैं।
पंजाब की सियासत में चुनावी माहौल बनने से पहले ही कांग्रेस एक बार फिर अंदरूनी खींचतान में उलझती नजर आ रही है। 25 जनवरी 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में आम आदमी पार्टी (AAP) जहां अपनी सरकार के कामकाज और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए अगली पारी की जमीन मजबूत करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर चर्चा और प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। इस खींचतान का सीधा असर पार्टी की एकजुटता और आने वाले महीनों की रणनीति पर पड़ सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष और लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को कई हलकों में दौड़ में आगे माना जा रहा है। पार्टी संगठन पर उनकी पकड़, आक्रामक राजनीतिक शैली और मैदान में सक्रियता उन्हें संभावित नेतृत्व के रूप में पेश करती है। लेकिन राह आसान नहीं है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री और दलित समाज के बड़े नेता चरणजीत सिंह चन्नी भी खुद को दावेदार के तौर पर स्थापित करने में लगे हैं।
यह मुकाबला सिर्फ दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं दिखता। रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा तीसरे अहम ध्रुव के रूप में उभरते नजर आ रहे हैं। बाजवा के समर्थक उन्हें अनुभवी और संतुलित नेतृत्व के रूप में देखते हैं, जिससे पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन त्रिकोणीय बनता जा रहा है।
चन्नी की तरफ से दलित प्रतिनिधित्व को लेकर उठाई जा रही बातों का भी राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब में अनुसूचित जातियों की आबादी करीब 32% के आसपास मानी जाती है और यह एक निर्णायक वोट-ब्लॉक है। चन्नी का तर्क है कि इतने बड़े सामाजिक वर्ग को संगठन और नेतृत्व दोनों स्तरों पर ज्यादा हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। हालांकि, पार्टी के भीतर कुछ नेताओं की राय है कि यह मांग सामाजिक न्याय के साथ-साथ नेतृत्व की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति भी हो सकती है।
रिपोर्ट में 2025 के लुधियाना वेस्ट उपचुनाव का संदर्भ भी आया है, जहां पार्टी के भीतर तालमेल की कमी और गुटीय संकेत सार्वजनिक तौर पर दिखे। ऐसे उदाहरण पार्टी हाईकमान के लिए चेतावनी की तरह हैं, क्योंकि चुनाव से पहले स्पष्ट नेतृत्व और संदेश की जरूरत होती है। कुल मिलाकर, पंजाब कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि वह नेतृत्व चयन और आंतरिक मतभेदों का प्रबंधन करते हुए चुनावी मुकाबले के लिए एकजुट कैसे होती है।