राजद में बढ़ता आंतरिक संकट: तेजस्वी यादव पर परिवार, पार्टी और सहयोगियों के सवाल
राजद में नेतृत्व को लेकर असंतोष की आवाजें तेज हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक तेजस्वी यादव पर परिवार के भीतर से लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और गठबंधन सहयोगियों तक, कई स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस के विधायकों की बैठक में भी राजद के साथ आगे की राजनीति को लेकर असहमति सामने आई है।
बिहार की राजनीति में राजद के भीतर उभरता नेतृत्व-संकट अब खुलकर चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर पार्टी के भीतर और बाहर, दोनों जगह से सवाल उठ रहे हैं। विवाद की शुरुआत परिवार के स्तर से हुई बताई गई है, जहां नेतृत्व और ‘लालूवाद’ की दिशा को लेकर तीखी टिप्पणियां सामने आईं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता भाई वीरेंद्र ने टिकट वितरण और स्थानीय नेताओं की अनदेखी जैसे मुद्दों पर नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया। उदाहरण के तौर पर एक सीट पर टिकट कटने और उसके चुनावी नतीजे का जिक्र करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि फैसलों की प्रक्रिया जमीन से जुड़े नेताओं के नजरिए से मेल नहीं खा रही।
संकट केवल राजद के भीतर तक सीमित नहीं दिखता। रिपोर्ट के मुताबिक महागठबंधन की साझेदार कांग्रेस में भी राजद के साथ भविष्य की राजनीति को लेकर बेचैनी बढ़ी है। 23 जनवरी 2026 को दिल्ली में हुई बैठक में कांग्रेस के सभी छह विधायकों ने राजद के साथ आगे की राजनीति पर असहमति जताई—हालांकि तत्काल अंतिम निर्णय की बात नहीं कही गई है।
आगे क्या संकेत मिलते हैं
रिपोर्ट में ‘समुद्र मंथन’ जैसी भाषा का इस्तेमाल कर यह संकेत दिया गया है कि 2025 के चुनावी नतीजों के बाद पार्टी में व्यापक आत्ममंथन का दौर चल रहा है। अब यह नेतृत्व पर निर्भर करेगा कि वह असंतोष के कारणों को सुनकर समाधान निकालता है या फिर मतभेद और गहरे होते हैं।
यदि यह खींचतान बढ़ती है, तो इसका असर न सिर्फ राजद की आंतरिक एकजुटता पर पड़ेगा, बल्कि गठबंधन के गणित और रणनीति पर भी दिखाई दे सकता है।