पश्चिम बंगाल में एसआईआर पर टकराव: चुनाव आयोग, तृणमूल और बीजेपी की सियासी खींचतान
मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर पश्चिम बंगाल में विवाद गहराता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस इसे वैध वोटरों के नाम कटने की आशंका से जोड़कर केंद्र और आयोग पर आरोप लगा रही है, जबकि बीजेपी ‘फर्जी नाम’ हटाने की दलील दे रही है।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सियासी संघर्ष तेज हो गया है। डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान यह मुद्दा बड़ा नहीं बन सका, लेकिन बंगाल में अप्रैल 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एसआईआर के प्रमुख चुनावी मुद्दा बनने के संकेत दिख रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुरुआत से ही एसआईआर पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। ममता बनर्जी ने आयोग को लिखे पत्रों में बिहार और बंगाल के लिए अलग-अलग मानदंड तय करने का आरोप लगाया, खासकर दस्तावेज़ों की वैधता और सत्यापन प्रक्रिया के संदर्भ में।
बीजेपी की दलील और ड्राफ्ट सूची पर बहस
बीजेपी का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस ‘फर्जी नाम’ हटने और अल्पसंख्यक वोट बैंक पर असर की आशंका के कारण विरोध कर रही है। रिपोर्ट में एक प्रमुख तथ्य के तौर पर यह उल्लेख है कि एसआईआर शुरू होने से पहले बीजेपी ने बड़े पैमाने पर ‘अवैध’ नाम हटने की बात कही थी, जबकि ड्राफ्ट सूची आने पर कटे नामों की संख्या अलग बताई गई।
तृणमूल की आपत्ति यह है कि सुनवाई और कागज़ों की जांच की प्रक्रिया के बहाने वैध मतदाताओं के नाम काटे जा सकते हैं। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि वैध वोटर का नाम कटा तो बड़े स्तर पर विरोध किया जाएगा। यह मुद्दा राज्य में प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर सीधे राजनीतिक ध्रुवीकरण का औजार बनता दिख रहा है।
मौतों के दावों ने विवाद और बढ़ाया
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एसआईआर के दबाव और कथित तनाव से जुड़ी मौतों के दावों को लेकर भी टकराव बढ़ा। तृणमूल नेताओं ने इसे ‘आतंक’ से जोड़कर आयोग और केंद्र पर आरोप लगाए, जबकि बीजेपी ने इन दावों को गलतबयानी करार दिया।
कुल मिलाकर, एसआईआर की प्रक्रिया अब तकनीकी-प्रशासनिक अभ्यास भर नहीं रह गई है। यह बंगाल की चुनावी राजनीति में ‘पहचान’, ‘वैधता’ और ‘मतदाता अधिकार’ की बहसों को साथ लेकर चल रही है, जिसके चलते आने वाले महीनों में विवाद और तेज होने की संभावना है।