ईरान में बढ़ती महंगाई और राजनीतिक असंतोष: नए प्रदर्शनों से शासन पर दबाव
ईरान में मुद्रा रियाल की तेज गिरावट और ऊंची महंगाई के बीच विरोध प्रदर्शनों की नई लहर सामने आई है। जानकार इसे केवल आर्थिक संकट नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक असंतोष का संकेत मान रहे हैं।
प्रदर्शन किस पृष्ठभूमि में भड़के
ईरान में दिसंबर के अंत से शुरू हुई हड़तालों और प्रदर्शनों ने यह दिखाया कि जीवनयापन की बढ़ती लागत अब राजनीतिक असंतोष में बदल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक 28 दिसंबर को तेहरान में व्यापारियों की हड़ताल से शुरू हुई हलचल, छात्रों की भागीदारी के बाद तेजी से फैल गई। कई शहरों से सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए जिनमें पुलिस की कार्रवाई और भीड़ के नारे दर्ज हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि ये प्रदर्शन केवल कीमतों के खिलाफ प्रतिक्रिया नहीं हैं। इनमें सरकार के प्रति घटते भरोसे, भ्रष्टाचार के आरोपों और विदेश नीति पर नाराजगी जैसी परतें भी दिखाई देती हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों का तर्क रहा कि सरकार घरेलू कल्याण पर ध्यान देने के बजाय क्षेत्रीय सहयोगी गुटों को प्राथमिकता देती है, जबकि आम नागरिक महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा है।
आर्थिक संकेतक: रियाल और मुद्रास्फीति
रिपोर्ट में बताया गया कि रियाल की कीमत ऐतिहासिक निचले स्तर तक जाने और महंगाई के 40 प्रतिशत से ऊपर बने रहने से जरूरी वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ीं। नतीजतन, घरों का बजट दबाव में है और कई परिवारों के लिए बुनियादी जरूरतें पूरा करना कठिन होता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार मुद्रा गिरने और लंबे समय से चली आ रही महंगाई के मेल ने लोगों और कारोबारियों के लिए रोजमर्रा के आर्थिक फैसले भी जोखिमभरे बना दिए हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे का जोखिम
रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने केंद्रीय बैंक प्रमुख को बदलने जैसे कदम उठाए और संवाद का संकेत दिया। सरकारी स्तर पर महंगाई के लिए प्रतिबंधों और ‘आर्थिक युद्ध’ जैसे तर्क भी सामने आए। हालांकि आलोचकों का कहना है कि अल्पकालिक कदम असंतोष को थोड़े समय के लिए कम कर सकते हैं, लेकिन जब तक जीवन स्तर में ठोस सुधार नहीं होता, विरोध का दबाव बना रह सकता है।
कुछ विपक्षी आवाजें इसे शासन के लिए बड़ी चुनौती बता रही हैं, जबकि अन्य का मानना है कि कठोर दमन और सीमित आर्थिक राहत के संयोजन से सरकार स्थिति संभालने की कोशिश करेगी। फिर भी संकेत साफ है: आर्थिक संकट अब ईरान की राजनीतिक स्थिरता की बहस का केंद्र बन गया है।