भारत-ईयू डील पर अमेरिका की आपत्ति, ट्रंप प्रशासन से जुड़ी टिप्पणी का हवाला
भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA बातचीत पूरी होने के बाद अमेरिकी पक्ष की कड़ी टिप्पणी सामने आई। रिपोर्ट में कहा गया कि वॉशिंगटन ने यूरोप को सलाह देते हुए आरोप लगाया कि वह अपने खिलाफ ‘जंग’ को फंड कर रहा है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा के दिन ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इसकी गूंज तेज हो गई। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की ओर से इस डील को लेकर आपत्ति जताने वाली टिप्पणी सामने आई, जिसे ट्रंप प्रशासन से जुड़े रुख के तौर पर पेश किया गया। खबर में कहा गया कि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की टिप्पणी ऐसे समय आई जब भारत-ईयू ने बातचीत पूरी कर ली थी और औपचारिक घोषणा 27 जनवरी 2026 को होनी थी।

रिपोर्ट का दावा है कि अमेरिकी पक्ष ने यूरोप को ‘सलाह’ देते हुए आरोप लगाया कि यूरोप अपने खिलाफ ‘जंग’ को फंड कर रहा है। इस बयान का संदर्भ क्या था और इसे किन कूटनीतिक/भूराजनीतिक मुद्दों से जोड़ा गया—इस पर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ सकती हैं, लेकिन इतना तय है कि डील ने केवल व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक संतुलन पर भी बहस छेड़ दी है।
भारत-ईयू करार के पक्ष में तर्क यह है कि दोनों पक्ष सप्लाई-चेन विविधीकरण, बाजार पहुंच और निवेश सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं। वहीं, विरोध या आलोचना की लाइन यह दर्शाती है कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बड़े ब्लॉक्स के बीच प्रतिस्पर्धा अब और तीखी हो गई है, और हर बड़ी डील को रणनीतिक नजर से देखा जा रहा है।
आगे देखना होगा कि क्या यह कूटनीतिक तल्खी सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहती है या इससे त्रिपक्षीय (भारत-यूरोप-अमेरिका) व्यापार वार्ताओं, निवेश निर्णयों और सुरक्षा सहयोग के समीकरण पर भी असर पड़ता है। फिलहाल, 27 जनवरी 2026 को सामने आई इस प्रतिक्रिया ने यह संकेत जरूर दिया है कि ‘ट्रेड डील्स’ अब केवल टैरिफ और बाजार की बात नहीं रहीं, बल्कि वे भू-राजनीतिक संदेश भी बन चुकी हैं।