सेमीकंडक्टर मिशन: 2026 में चार प्लांट्स से कमर्शियल चिप प्रोडक्शन शुरू होने का दावा
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 भारत के लिए सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिहाज से अहम साल हो सकता है, जब चार कंपनियां व्यावसायिक स्तर पर चिप उत्पादन शुरू करेंगी।
2026 को ‘टर्निंग पॉइंट’ के रूप में पेश किया जा रहा है
भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को लेकर एक रिपोर्ट में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के बयान का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में देश में चार सेमीकंडक्टर कंपनियां कमर्शियल चिप प्रोडक्शन शुरू कर सकती हैं। इसे ‘ऐतिहासिक’ कदम के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इससे भारत की सप्लाई चेन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और टेक आत्मनिर्भरता को दीर्घकालिक सहारा मिलने की उम्मीद जताई जाती है।

कौन-कौन सी इकाइयों का जिक्र
रिपोर्ट में माइक्रॉन, सीजी पावर, केन्स टेक्नोलॉजी और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी इकाइयों का उल्लेख किया गया है। लक्ष्य यह है कि भारत में डिजाइन, निर्माण, असेंबली/टेस्टिंग और पैकेजिंग जैसे चरणों में क्षमता बढ़े, ताकि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन में देश की हिस्सेदारी मजबूत हो सके।
इसका असर कहां दिख सकता है
कमर्शियल चिप प्रोडक्शन शुरू होने से इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, ऑटोमोबाइल/ईवी, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलने की संभावना बताई जाती है। साथ ही, स्किलिंग, लोकल सप्लायर्स और हाई-वैल्यू जॉब्स के अवसर भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, टाइमलाइन पर वास्तविक प्रगति फैक्टरी-रेडीनेस, उपकरण आपूर्ति, क्वालिटी/यील्ड और वैश्विक मांग जैसे कारकों पर निर्भर करेगी।
- 2026 में 4 कंपनियों के कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करने का दावा
- सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में सप्लाई चेन और स्किलिंग पर जोर
- ईवी, मोबाइल, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर संभावित असर
यदि ये प्रोजेक्ट तय समय पर आगे बढ़ते हैं, तो भारत की चिप रणनीति को बड़े पैमाने पर विश्वसनीयता मिल सकती है—और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में मूल्यवर्धन बढ़ाने का लक्ष्य भी करीब आएगा।