2026 में ‘एजेंटिक AI’ का दौर: स्कूल, अस्पताल और फैक्ट्री में बढ़ेगा दखल, काम करने का तरीका बदलेगा
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में AI सिर्फ चैटबॉट नहीं रहेगा, बल्कि ‘एजेंटिक’ सिस्टम के रूप में शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी सेवाओं और उद्योग में निर्णय-समर्थन और ऑटोमेशन के जरिए बड़ा बदलाव ला सकता है.
टेक्नोलॉजी की दुनिया में 2026 को AI के अगले चरण का साल माना जा रहा है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक AI अब केवल सवालों के जवाब देने वाले चैटबॉट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ‘एजेंटिक AI’ के रूप में ऐसे सिस्टम विकसित होंगे जो लक्ष्य लेकर अपने-आप कई कदम उठाकर काम पूरा कर सकें। इसका असर स्कूलों, अस्पतालों, फैक्ट्रियों, सरकारी दफ्तरों और कंपनियों के कामकाज के तरीके पर दिख सकता है.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2025 में जनरेटिव AI का जबरदस्त क्रेज देखा गया, लेकिन संस्थानों के लिए चुनौती यह रही कि AI से वास्तविक व्यावसायिक लाभ कैसे निकाला जाए। इसी संदर्भ में विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 वह समय हो सकता है जब AI ‘हाइप’ से निकलकर अधिक परिपक्व, उपयोग-केंद्रित और कार्य-आधारित सिस्टम के रूप में स्थापित होगा—जहां AI टूल केवल सुझाव देने तक सीमित न रहकर प्रक्रियाओं को चलाने में भी भूमिका निभा सकता है.
स्वास्थ्य: तेज़ ट्रायल, बेहतर डायग्नोसिस
रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में AI क्लीनिकल ट्रायल को तेज़ करने, एक्स-रे/सीटी/एमआरआई जैसी जांच रिपोर्ट को अधिक तेज़ और सटीक बनाने और टेलीमेडिसिन में मरीजों को सही डॉक्टर तक पहुंचाने में मदद कर सकता है। डिजिटल बायोलॉजी और प्रोटीन स्ट्रक्चर जैसी दिशा में AI के उपयोग का उल्लेख भी किया गया है, जिससे दवा खोज और उपचार रणनीतियों में समय व लागत घट सकती है.
सरकार और पब्लिक सेक्टर: सेवाओं का ऑटोमेशन
रिपोर्ट में यह संभावना भी व्यक्त की गई है कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान, डेटा अपडेट और सेवा-डिलीवरी ऑटोमेशन में AI की भूमिका बढ़ेगी। इससे प्रक्रियाएं तेज़ हो सकती हैं, लेकिन साथ में डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे प्रश्न भी अधिक महत्वपूर्ण होंगे. इसलिए ‘रेस्पॉन्सिबल AI’ और सुरक्षित उपयोग के लिए मानक/दिशानिर्देशों की जरूरत पर भी चर्चा होती है.
उद्योगों में, एजेंटिक AI सप्लाई चेन, HR, कस्टमर सर्विस, फाइनेंस और रोबोटिक्स के साथ मिलकर उत्पादन और लॉजिस्टिक्स को अधिक कुशल बना सकता है। हालांकि, इसके साथ स्किलिंग और जॉब-रीडिज़ाइन की जरूरत बढ़ेगी, ताकि कर्मचारियों को नए टूल्स के साथ काम करने और उच्च-स्तरीय, रचनात्मक भूमिकाओं में शिफ्ट होने का अवसर मिले.
कुल मिलाकर, रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि 2026 में सवाल यह नहीं रहेगा कि AI क्या कर सकता है—बल्कि यह कि संगठन AI के साथ मिलकर क्या-क्या कर सकते हैं, और इसे सुरक्षित व सार्थक तरीके से कैसे लागू किया जाए.