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WhatsApp प्राइवेसी पर नया मुकदमा: ‘एंड-टू-एंड’ एन्क्रिप्शन दावों को लेकर मेटा पर आरोप; कंपनी ने आरोपों से इनकार किया

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में दायर एक मुकदमे में मेटा पर आरोप लगा है कि उसने WhatsApp के ‘एंड-टू-एंड’ एन्क्रिप्शन और मैसेज प्राइवेसी को लेकर यूजर्स को गुमराह किया। मेटा ने आरोपों को खारिज करते हुए मुकदमे को निराधार बताया।

WhatsApp की मैसेजिंग प्राइवेसी को लेकर मेटा (Meta) एक नए कानूनी विवाद में घिरती दिख रही है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की एक अदालत में दायर मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने अरबों WhatsApp यूजर्स को उनके मैसेज की गोपनीयता के बारे में भ्रमित किया और यह दावा किया कि चैट्स पूरी तरह ‘एंड-टू-एंड’ एन्क्रिप्टेड हैं, जबकि व्यावहारिक रूप से कंपनी के पास निजी चैट्स तक पहुंच और उन्हें स्टोर करने की क्षमता हो सकती है।

WhatsApp प्राइवेसी पर नया मुकदमा: ‘एंड-टू-एंड’ एन्क्रिप्शन दावों को लेकर मेटा पर आरोप; कंपनी ने आरोपों से इनकार किया
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रिपोर्ट में बताया गया कि मुकदमे का फोकस WhatsApp के सुरक्षा दावों और ‘कंपनी खुद मैसेज एक्सेस नहीं कर सकती’ जैसी बातों पर है। इसी आधार पर वादी पक्ष का कहना है कि यूजर्स के साथ प्राइवेसी के संदर्भ में गलत प्रस्तुति की गई। यह मुकदमा ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में डेटा संरक्षण, प्लेटफॉर्म पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर टेक कंपनियों पर नियामकीय दबाव बढ़ता जा रहा है।

मेटा ने इन आरोपों से इनकार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का कहना है कि मुकदमा बेबुनियाद है और WhatsApp की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उसके दावे गलत तरीके से प्रस्तुत किए जा रहे हैं। मेटा की ओर से आम तौर पर यह रेखांकित किया जाता रहा है कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का अर्थ यह है कि भेजने वाला और पाने वाला ही संदेश पढ़ सकता है, बीच में प्लेटफॉर्म नहीं।

हालांकि, प्राइवेसी विवादों में तकनीकी बारीकियां अक्सर निर्णायक होती हैं—जैसे बैकअप, मेटाडेटा, रिपोर्टिंग/मॉडरेशन फीचर्स, या यूजर सेटिंग्स का प्रभाव। ऐसे मामलों में अदालत आम तौर पर यह जांचती है कि कंपनी ने उपभोक्ताओं को क्या स्पष्ट रूप से बताया, और क्या किसी फीचर/प्रक्रिया से वास्तविक प्राइवेसी अपेक्षाएं टूटती हैं।

यूजर्स के लिए व्यावहारिक सबक यह है कि प्राइवेसी केवल एक दावे का नाम नहीं, बल्कि फीचर्स और आदतों का भी परिणाम होती है—जैसे क्लाउड बैकअप सेटिंग्स, डिवाइस सुरक्षा, और संदिग्ध लिंक/फाइल से सावधानी। अब नजर इस पर रहेगी कि यह मुकदमा अदालत में किस दिशा में आगे बढ़ता है, और क्या इससे WhatsApp की प्राइवेसी कम्युनिकेशन या फीचर पॉलिसी पर कोई असर पड़ता है।

REPORTING RECORD

स्रोत और रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

  1. NDTV Business (Hindi)NDTV Business (Hindi)