गणतंत्र दिवस परेड 2026 में तकनीक की झलक: सेना के रोबोटिक ‘म्यूल’ और एआई-एकीकरण पर फोकस
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में सेना के रोबोटिक म्यूल प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहे। सेना ने नेटवर्किंग और डेटा-सेंट्रिसिटी को प्राथमिकता बताते हुए आगे एआई-एकीकरण की जरूरत पर भी संकेत दिए।
रोबोटिक म्यूल क्या हैं और परेड में क्यों चर्चा में रहे
गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में सैन्य तकनीक को लेकर एक खास बिंदु चर्चा में रहा—सेना के रोबोटिक ‘म्यूल’। रिपोर्ट के अनुसार, ये रोबोटिक प्लेटफॉर्म परेड के आकर्षणों में शामिल रहे और भविष्य में दुर्गम इलाकों में ऑपरेशन क्षमता बढ़ाने जैसी जरूरतों से जोड़े जा रहे हैं।

‘म्यूल’ शब्द का उपयोग आम तौर पर ऐसे प्लेटफॉर्म के लिए होता है जो बोझ ढोने, सप्लाई पहुंचाने या सैनिकों के साथ सपोर्ट-रोल निभाने में मदद करे। पहाड़ी या कठिन इलाकों में जहां मानव या पारंपरिक वाहन की आवाजाही सीमित होती है, ऐसे रोबोटिक साधन लॉजिस्टिक्स और रेस्क्यू-सपोर्ट में भूमिका निभा सकते हैं।
एआई, नेटवर्किंग और डेटा-सेंट्रिसिटी की दिशा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सेना 2026 और 2027 को ‘नेटवर्किंग और डेटा-सेंट्रिसिटी’ के वर्ष के तौर पर देख रही है, जिसमें प्रणालियों को बड़े पैमाने पर एक-दूसरे से एकीकृत करने की बात कही गई है। इसी क्रम में, रोबोटिक म्यूल को ऑपरेशनल उपयोग से पहले कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के साथ पूरी तरह जोड़ने की आवश्यकता का उल्लेख भी आया।
इसका संकेत यह है कि भविष्य का सैन्य संचालन केवल हार्डवेयर प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सेंसर डेटा, सुरक्षित नेटवर्क, रियल-टाइम कमांड और निर्णय-सहायता प्रणाली जैसी तकनीकों के साथ एक समेकित ढांचे की तरफ बढ़ेगा। परेड में इस तरह के प्लेटफॉर्म दिखना नीति-निर्माताओं और रक्षा उद्योग के लिए भी यह संकेत देता है कि भारतीय सेना आधुनिक, स्वदेशी और तकनीक-सक्षम क्षमता की दिशा में निवेश को प्राथमिकता दे रही है।
परेड का मंच प्रतीकात्मक है, लेकिन यहां दिखी तकनीक आने वाले वर्षों की सैन्य प्राथमिकताओं की झलक भी देती है।