इंडोनेशिया के वेस्ट जावा में भूस्खलन: कम से कम 11 की मौत, दर्जनों लापता; कीचड़ और अस्थिर जमीन से राहत कार्य मुश्किल
इंडोनेशिया के वेस्ट जावा प्रांत में माउंट बुरांगरांग की ढलानों से हुए भीषण भूस्खलन में कम से कम 11 लोगों की मौत हुई और 79 लोग लापता बताए गए। भारी बारिश से हुई तबाही के बाद कई घर कीचड़ और मलबे में दब गए; जमीन बहुत नरम और अस्थिर होने के कारण भारी मशीनरी का उपयोग सीमित रहा और बचाव दलों को हाथों व औजारों से खुदाई करनी पड़ी।
इंडोनेशिया के मुख्य द्वीप जावा पर वेस्ट जावा प्रांत में भारी बारिश के बाद आए विनाशकारी भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। एपी (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, वेस्ट जावा के पासिर लांगू गांव में शनिवार तड़के माउंट बुरांगरांग की ढलानों से मलबा और कीचड़ नीचे आया, जिसमें कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। रविवार तक 79 लोग लापता बताए गए, जिनके बारे में आशंका है कि वे मिट्टी, चट्टानों और उखड़े पेड़ों के नीचे दबे हो सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि भूस्खलन ने लगभग 34 घरों को बुरी तरह प्रभावित किया, जिनमें कई मकान 5 मीटर (करीब 16 फीट) तक कीचड़ और मलबे में दब गए। आसपास के क्षेत्र से करीब 230 लोगों को अस्थायी सरकारी शेल्टर में पहुंचाया गया। राहतकर्मियों ने रविवार सुबह दो और शव निकाले, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई।
बचाव अभियान बेहद कठिन परिस्थितियों में चल रहा है। कीचड़ से भरी अस्थिर ढलान और पानी से भीगी जमीन के कारण भारी मशीनें व एक्सकेवेटर ज्यादातर निष्क्रिय रहे। ऐसे में टीमों को हाथों, फावड़ों और खेतों में इस्तेमाल होने वाले औजारों से खुदाई करनी पड़ी। वीडियो फुटेज में भी राहतकर्मी मिट्टी में सने शव को सावधानी से निकालकर बॉडी बैग में रखते दिखे।
इंडोनेशिया की राष्ट्रीय खोज एवं बचाव एजेंसी (Basarnas) ने ड्रोन, K-9 यूनिट और ग्राउंड टीमों की मदद से तलाश तेज की है, लेकिन अधिकारियों ने साफ किया कि खराब मौसम और भू-भाग की स्थिति के कारण सुरक्षा प्राथमिकता रहेगी। इंडोनेशिया के उपराष्ट्रपति गिब्रान राकाबुमिंग राका ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर भविष्य में जोखिम कम करने के लिए आपदा-प्रवण इलाकों में भूमि उपयोग और ‘लैंड कन्वर्जन’ पर सख्त कदम उठाने की जरूरत बताई।
इंडोनेशिया में अक्टूबर से अप्रैल के बीच मानसूनी/मौसमी बारिश के दौर में बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं अक्सर सामने आती हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहाड़ी ढलान और बसावट एक-दूसरे के करीब हैं। ताज़ा घटना ने एक बार फिर तेज बारिश, कमजोर ढलानों और बसावट की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है।