टेक्सास में H-1B वीजा पर सख्ती: राज्य एजेंसियों व सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में नई अर्जियों पर रोक
अमेरिका के टेक्सास में गवर्नर ग्रेग एबॉट ने H-1B वीजा से जुड़ी नई याचिकाओं पर सख्त कदम उठाया है। आदेश के मुताबिक राज्य की एजेंसियों और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में नई H-1B अर्जियों पर रोक लगाई गई है, जो 31 मई 2027 तक प्रभावी रहेगी।
अमेरिका के टेक्सास राज्य में H-1B वीजा को लेकर एक बड़ा सख्त कदम सामने आया है। राज्य के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने आदेश जारी कर टेक्सास की सभी राज्य एजेंसियों और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में नई H-1B वीजा याचिकाओं पर रोक लगाने को कहा है। यह रोक तत्काल प्रभाव से लागू बताई गई है और 31 मई 2027 तक प्रभावी रहने की बात कही गई है।

H-1B वीजा अमेरिका का एक प्रमुख वर्क वीजा प्रोग्राम माना जाता है, जिसका इस्तेमाल कई संस्थान विशेष कौशल वाले कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए करते हैं। टेक्सास में सामने आए इस कदम को नौकरी और वर्कफोर्स नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह निर्णय राज्य के सरकारी तंत्र और सार्वजनिक उच्च शिक्षा संस्थानों की भर्ती रणनीति को सीधे प्रभावित करता है।
गवर्नर के बयान का केंद्रीय तर्क यह बताया गया है कि अमेरिकी नौकरियां अमेरिकी कामगारों को मिलनी चाहिए। इसी लक्ष्य को सामने रखकर राज्य स्तर पर यह नियंत्रण लागू किया गया। यह निर्णय खासतौर पर उन विभागों और विश्वविद्यालयों पर असर डाल सकता है जहां तकनीकी, शोध और विशेषज्ञ भूमिकाओं में अक्सर विदेशी प्रतिभाओं की भर्ती होती रही है।
भारतीय समुदाय के लिए H-1B का महत्व इसलिए भी बड़ा माना जाता है क्योंकि टेक उद्योग और STEM भूमिकाओं में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर काम करते हैं। टेक्सास जैसे बड़े राज्य में सार्वजनिक संस्थानों के स्तर पर नई याचिकाओं की रोक संभावित रूप से भर्ती प्रक्रिया, परियोजनाओं की स्टाफिंग और कुछ शोध कार्यक्रमों की गति पर भी प्रभाव डाल सकती है, खासकर जहां विशिष्ट कौशल की मांग अधिक रहती है।
हालांकि यह आदेश निजी कंपनियों पर लागू नहीं बताया गया है, फिर भी नीति संकेतों के स्तर पर इसकी चर्चा व्यापक हो गई है। अक्सर ऐसी राज्य स्तरीय पहलें अन्य राज्यों में बहस को हवा देती हैं और फेडरल स्तर पर चल रही इमिग्रेशन तथा वीजा नीति संबंधी राजनीतिक बहस को भी नया संदर्भ देती हैं।
आने वाले महीनों में यह देखने वाली बात होगी कि टेक्सास में सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और राज्य एजेंसियों की मानव संसाधन जरूरतें इस बदलाव के बाद कैसे पूरी होती हैं, और क्या कुछ विभाग वैकल्पिक वीजा श्रेणियों, अनुबंध आधारित नियुक्तियों या घरेलू भर्ती अभियानों के जरिए रिक्तियों को भरने की ओर बढ़ते हैं।