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रूस-यूक्रेन युद्ध: अबू धाबी में पहली त्रिपक्षीय शांति वार्ता बेनतीजा, आगे की राह अनिश्चित

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध रोकने के लिए अबू धाबी में हुई पहली त्रिपक्षीय बैठक किसी ठोस समझौते के बिना समाप्त हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्षविराम और कब्ज़े वाले क्षेत्रों जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को थामने की कोशिशों को झटका लगा है। अबू धाबी में हुई पहली त्रिपक्षीय बैठक बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। यह बैठक इसलिए अहम मानी जा रही थी क्योंकि लंबे समय से अलग-अलग मंचों पर चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बीच ‘सीधे’ संवाद का यह एक नया प्रयास था, लेकिन बातचीत के अंत में किसी समझौते या निर्णायक प्रगति की घोषणा नहीं हो सकी।

रूस-यूक्रेन युद्ध: अबू धाबी में पहली त्रिपक्षीय शांति वार्ता बेनतीजा, आगे की राह अनिश्चित
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रिपोर्ट के अनुसार, वार्ता के दौरान सबसे बड़ी अड़चन संघर्षविराम की शर्तों और उन क्षेत्रों को लेकर रही जो युद्ध की शुरुआत के बाद से विवाद के केंद्र में हैं। दोनों पक्षों की प्राथमिकताएं और सुरक्षा संबंधी शर्तें अलग-अलग रहने के कारण मध्यस्थता की जगह भी सीमित नजर आई। बैठक में रूस, यूक्रेन और मध्यस्थ देशों/प्रतिनिधियों की मौजूदगी बताई गई, लेकिन अंतिम वक्तव्य में कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया।

हमलों का साया और बातचीत का माहौल

युद्धभूमि पर तनाव का असर बातचीत के वातावरण पर भी पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया कि रूस की ओर से यूक्रेन के विभिन्न इलाकों में हमलों/बमबारी का सिलसिला जारी रहने से वार्ता के दौरान भरोसे की कमी और बढ़ी। ऐसे में किसी भी तत्काल समझौते के लिए न्यूनतम ‘विश्वास-निर्माण उपाय’ बनना मुश्किल रहा।

अब आगे क्या?

इस बैठक के बाद अगला कदम क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। अगली बैठक कब और कहां होगी, या क्या किसी नए प्रारूप में बातचीत होगी—इस पर तत्काल कोई ठोस संकेत नहीं मिला। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से दबाव और मानवीय हालात की चिंता बनी हुई है, इसलिए कूटनीतिक कोशिशें पूरी तरह रुकेंगी ऐसा कहना भी जल्दबाजी होगी।

फिलहाल, अबू धाबी बैठक का बेनतीजा रहना यह दिखाता है कि युद्ध रोकने की राजनीतिक-रणनीतिक ‘कीमत’ को लेकर दोनों पक्षों की अपेक्षाएं अभी भी काफी दूर हैं। जब तक संघर्षविराम की विश्वसनीय निगरानी, सुरक्षा गारंटी और क्षेत्रीय विवादों पर न्यूनतम साझा जमीन नहीं बनती, तब तक ऐसे शांति प्रयासों के निर्णायक नतीजों तक पहुंचने की राह कठिन बनी रह सकती है।

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  1. Navbharat TimesNavbharat Times