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ईयू-मर्कोसुर डील पर सहमति, फ्रांस समेत यूरोपीय किसान नाराज

यूरोपीय संघ ने दक्षिण अमेरिकी समूह मर्कोसुर के साथ लंबे समय से अटके व्यापार समझौते को मंजूरी दी. समर्थकों का कहना है कि इससे निर्यात, शुल्क बचत और रणनीतिक विकल्प बढ़ेंगे, जबकि फ्रांस समेत कई देशों में किसान इसे कृषि हितों के लिए खतरा बताकर विरोध कर रहे हैं. समझौते पर दस्तखत 17 जनवरी को पराग्वे में होने की बात कही गई.

किस समझौते पर सहमति बनी

यूरोपीय संघ (ईयू) और मर्कोसुर (अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे, उरुग्वे) के बीच एक बड़े व्यापार समझौते को आखिरकार राजनीतिक मंजूरी मिल गई. रिपोर्ट के मुताबिक ब्रसेल्स में राजदूतों की बैठक के बाद ईयू के 27 सदस्य देशों में से बहुमत ने इसे समर्थन दिया. अर्जेंटीना की ओर से कहा गया कि दस्तखत 17 जनवरी 2026 को पराग्वे में किए जाएंगे.

ईयू-मर्कोसुर डील पर सहमति, फ्रांस समेत यूरोपीय किसान नाराज
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समर्थक इसे 25 साल से अटकी प्रक्रिया के टूटने के रूप में देखते हैं. उनके अनुसार समझौता वैश्विक अनिश्चितता के दौर में व्यापारिक पहुंच बढ़ाने और ईयू की सुस्त अर्थव्यवस्था को सहारा देने का माध्यम बन सकता है.

किसने समर्थन किया और क्यों

यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला फॉन डेय लाएन ने इसे ईयू की ‘स्वतंत्र निर्णय क्षमता’ और भरोसेमंद साझेदारी का संकेत बताया. जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने इसे रणनीतिक संप्रभुता और कदम उठाने की क्षमता का संदेश कहा. मर्कोसुर की ओर से ब्राजील के राष्ट्रपति लुइस इनासियो लूला दा सिल्वा ने इसे बहुपक्षवाद के लिए ऐतिहासिक दिन बताया.

ईयू का दावा है कि इस समझौते से यूरोपीय कंपनियां हर साल करीब चार अरब यूरो के शुल्क की बचत कर सकेंगी. साथ ही लैटिन अमेरिकी बाजारों में वाहन, मशीनरी, वाइन और शराब जैसे उत्पादों के निर्यात को गति मिल सकती है.

विरोध किस बात का है

फ्रांस में किसान संगठनों और कई राजनीतिक समूहों ने आशंका जताई कि सस्ते कृषि-आयात से घरेलू कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ेगा. रिपोर्ट के अनुसार आयरलैंड, पोलैंड, हंगरी और ऑस्ट्रिया ने भी विरोध में वोट दिया. हालांकि यह विरोध इसे रोकने के लिए पर्याप्त नहीं रहा, क्योंकि इटली ने अंततः समर्थन कर दिया.

किसान संगठनों के विरोध का केंद्र यह है कि व्यापार उदारीकरण का लाभ उद्योग और निर्यातकों को दिखता है, लेकिन कृषि क्षेत्र को प्रतिस्पर्धा, मानकों और कीमतों के स्तर पर नुकसान का डर रहता है. यही वजह है कि फ्रांस के अलावा ईयू मुख्यालय ब्रसेल्स में भी प्रदर्शन दर्ज किए गए.

आगे की बड़ी बातें

  • 17 जनवरी 2026 को पराग्वे में दस्तखत की प्रक्रिया और उसके बाद राष्ट्रीय संसदों/संस्थानों की भूमिका
  • कृषि-सुरक्षा उपाय, आयात कोटा/मानक और किसानों के लिए मुआवजा या संक्रमण पैकेज पर फैसले
  • ईयू की रणनीतिक सप्लाई-चेन (जैसे रेयर अर्थ) और मर्कोसुर के साथ दीर्घकालीन भू-आर्थिक रिश्ते

कुल मिलाकर यह समझौता ईयू के लिए एक बड़ा भू-आर्थिक कदम है, लेकिन इसके घरेलू राजनीतिक और कृषि-आधारित विरोध आने वाले महीनों में नीति-निर्माताओं की परीक्षा लेते रहेंगे.

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