प्योंगयांग का 2026 का पहला मिसाइल टेस्ट, वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई की भी निंदा
उत्तर कोरिया ने 2026 की शुरुआत में बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण कर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया। जापान ने इसे शांति व स्थिरता के लिए खतरा बताया, जबकि प्योंगयांग ने वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा भी की।
उत्तर कोरिया ने 4 जनवरी 2026 को 2026 का अपना पहला बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण किया। डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, इसे शक्ति प्रदर्शन और चेतावनी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। परीक्षण की टाइमिंग भी चर्चा में रही, क्योंकि उसी दिन दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति एक कारोबारी और टेक प्रतिनिधिमंडल के साथ चीन पहुंचे थे।

रिपोर्ट में बताया गया कि जापान ने दावा किया कि कम-से-कम दो मिसाइल दागे गए और उनकी उड़ान दूरी अलग-अलग रही। जापान की तरफ से इसे क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए खतरा करार दिया गया। घटनाक्रम ने एशिया-प्रशांत सुरक्षा माहौल में पहले से मौजूद तनाव को फिर से तेज कर दिया।
वेनेजुएला मुद्दा और उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया
डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, प्योंगयांग ने वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई की सख्त निंदा भी की। विश्लेषकों ने संभावना जताई कि परीक्षण का एक उद्देश्य वैश्विक घटनाओं पर प्रतिक्रिया दर्ज कराना और अपने सहयोगी देशों के प्रति राजनीतिक समर्थन प्रदर्शित करना भी हो सकता है।
वहीं, सुरक्षा विशेषज्ञ अक्सर ऐसे परीक्षणों को आंतरिक राजनीति, सैन्य-तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन, और क्षेत्रीय कूटनीति में दबाव बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखते हैं। इस मामले में भी, परीक्षण की घोषणा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं ने संकेत दिया कि आने वाले महीनों में कूटनीतिक तनाव बढ़ सकता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
मिसाइल परीक्षणों के बाद सामान्यतः दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका के बीच समन्वय और तेज होता है, जबकि उत्तर कोरिया इसे अपनी ‘रक्षा जरूरत’ से जोड़कर पेश करता है। इस नए परीक्षण ने चीन की कूटनीतिक भूमिका और क्षेत्रीय संतुलन पर बहस को भी पुनर्जीवित कर दिया।
कुल मिलाकर, 2026 की शुरुआत में यह घटनाक्रम संकेत देता है कि कोरियाई प्रायद्वीप और उससे जुड़े समुद्री मार्गों में सुरक्षा संबंधी अनिश्चितता बनी रह सकती है, जिसका असर व्यापार, उड़ानों, और रणनीतिक संवाद की प्राथमिकताओं पर भी पड़ता है।